जाने कैसे गंध एवं सुगंध को हमारा मष्तिष्क कैसे पहचानता है ?

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फूलों की महक हो या खाने में पड़ने वाले मसाले उन्हें उनकी विशिष्ट सुगंध से पहचाना जा सकता है। कुछ दुर्गंध भी होती है जैसे पसीने, पुराने मोजे से आने वाली दुर्गंध। क्या आप जानते हैं कि हमारा मष्तिष्क इन गंधों को कैसे पहचान पता है ? इन सभी गंध के पीछे भी रसायन हैं जो उन्हें विशिष्ट पहचान देते हैं। इन रसायनों के माध्यम से ही हम सुगंध या दुर्गन्ध का भेद समझ पाते हैं। आइए जानें कुछ मुख्य गंध के पीछे का रसायनः

लौंग की सुगंध
गरम मसाले का प्रमुख अवयव लौंग, अपने औषधीय गुणों के लिए भी मशहूर है। इसके तेल का उपयोग कई उपचारों में किया जाता है। इसकी विशिष्ट सुगंध एक कार्बनिक यौगिक ‘यूजेनाॅल‘ के कारण है। जिसका आणविक सूत्र C10H12O2 है। इसका यूजेनाॅल नाम भी लौंग के वैज्ञानिक नाम ‘यूजेनिया अरोमाटिकम‘ से बना है। लौंग से प्राप्त इस रसायन का उपयोग इत्र, विशिष्ट स्वाद और बहुत सी औषधियों में एंटीसेप्टिक और निश्चेतक के रुप में किया जाता है।

गुलाब की खुशबू
गुलाब जल जिसमें गुलाब की खुशबू होती है। जिसे गुलाब के फूल की पखुड़ियों से निकाला जाता है। गुलाब की सुगंध के लिए जिम्मेवार रसायन का नाम ‘फेनाइलएथाइल एल्कोहल‘ C6H5CH2CH2OH है। यह एक कार्बनिक यौगिक है। यह रंगहीन द्रव्य प्रकृति में व्यापक रुप से तथा और भी कई फूलों में पाया जाता है। इसका उपयोग इत्र, पकवानों में गुलाब की सुगंध के लिए किया जाता है।

फलों का गंध
लगभग सभी फलों में गंध, ‘इस्टर‘ के कारण होती है। इस्टर एक रसायनिक यौगिकों का वर्ग है जिसमंे कार्बोनाइल एवं इथर होते हैं। ये कई प्रकार के होते हैं जो अलग-अलग फलों को विशिष्ट सुगंध प्रदान करते हैं जैसे आइसोएमाइल एसीटेट से केला, पेंटाइल पेंटानोएट से सेव, लिमोनेन से संतरा इत्यादि।

कपूर की सुगंध
पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होनवाला कपूर, एक सदाबहार पेड़ कैंफोर लोरियल की लकड़ियों से निकाला जाता है। कपूर एक सुगंधित रसायन है। यह एक तरपेनोइड है जिसका आणविक सूत्र C10H16O होता है। कपूर को कपूर तुलसी से भी निकाला जाता है। कपूर का, सुगंध के रुप में उपयोग मुख्यतः खानों में और आरती के लिए किया जाता है।


लहसुन
लहसून का उपयोग इसकी गंध के लिए मसाले के रुप में होता है। यह प्याज की ही एक प्रजाति है। इसके तीक्ष्ण गंध राज इसमें उपस्थित रसायन ‘सल्फर यौगिक‘ है। मुख्यतः एलीसीन और इसके अपघटित उत्पाद, डाइएलाइल डाइसल्फाइड एवं डाइएलाइल ट्राइसल्फाइड लहसुन के विशिष्ट गंध में योगदान करते हैं। ज्यादा लहसुन खाने पर मुंह से और पसीने से दुर्गंध का कारण लहसुन के चयापचय एलाइल मिथाइल सल्फाइड है जो पच नहीं पाता और रक्त में मिल जाता है। खून के द्वारा फेफड़ों और त्वचा में पहुंचता है। जहां से यह उत्सर्जित होता है। लहसुन का उपयोग खाने और औषधि के रुप लगभग 4000 वर्षो से होता आ रहा है।

चंदन
सेंटालोल-अल्फा और सेंटालोल-बिटा नामक रसायन, चंदन को सुगंध प्रदान करता है। चंदन से निकाले तेल का उपयोग इत्र, सौंदर्य प्रसाधनों तथा मरहम के रुप में किया जाता है। पिछले कुछ दशकों में चंदन के पेड़ों के अत्याधिक कटाई से ये संकटग्रस्त हैं जिससे इसके प्राकृतिक तेल मंहगे हो गए हैं। आइसोबोर्नाइल साइक्लोहेक्सानोल (आई बी सी एच) चंदन के प्राकृृतिक तेल/सुगंध का सस्ता विकल्प है।


मिट्टी की महक
बारिश के बाद मिट्टी की सौंधी-सौंधी खुशबू एक विशेष रसायन जियोस्मिन C12H22O के कारण आती है जो एक कार्बनिक यौगिक है। इस गंध के लिए सूक्ष्मजीव/ बैक्टीरिया जिम्मेदार होते हैं।


पुदीना
पुदीना का उपयोग चटनी, शरबत, मिठाइयों में काफी समय से होता आ रहा है। इसकी अनूठी गंध मुख्यतः मेनथाॅल से मिलती है। मेनथाॅल का उपयोग च्यूइंगम, कैंडी, माउथ फ्रेशनर, तथा टूथपेस्ट में सुंगध देने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। पुदीने का उपयोग गृह उपचार में पेट दर्द के लिए किया जाता है। इसकी दर्जनों प्रजातियां हैं।


अदरक
अदरक की विशिष्ट सुगंध और स्वाद तीन रसायन जिंजरोन, जिंजरोल एवं शोगोल के मिश्रण के कारण होता है। इनमें जिंजरोन अदरक की तीक्ष्ण सुंगध के लिए जिम्मेदार होता है जो कच्चे (तुरंत निकाले गए) अदरक के सुखने या पकाये जाने के बाद इसमंे उपस्थित जिंजरोल से बनता है। इसका उपयोग मसाले और औषधि के रुप में किया जाता है।

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