इसको कहते हैं भारत का मिनी स्विट्जरलैंड , यह नहीं देखा तो एक बार बना लो प्लान

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उत्तराखंड का खूबसूरत हिल स्टेशन चोपता ( Chopta ) आजकल देश-विदेश के सैलानियों का सबसे बड़ा आकर्षण बन रहा है। हिमालय की तलहटी में बसा ये छोटा सा लेकिन बेहद सुंदर जगह अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, बर्फीली चोटियों और हरी-भरी घाटियों की वजह से “भारत का मिनी स्विट्जरलैंड” ( Mini Switzerland of India ) कहलाता है। फरवरी-मार्च 2026 में यहां आने वाले पर्यटकों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। ट्रेकिंग करने वाले, भगवान के भक्त और एडवेंचर पसंद करने वाले नौजवान इसे सबसे पसंदीदा जगह बना चुके हैं। खासकर तुंगनाथ मंदिर और चंद्रशिला पीक का ट्रेक सबसे ज्यादा लोकप्रिय है।

पर्यटन विभाग के मुताबिक, फरवरी-मार्च में चोपता का मौसम बहुत ही खास होता है। इस वक्त बर्फ और हरी घास का दुर्लभ नजारा देखने को मिलता है। फरवरी में पहाड़ बर्फ से पूरी तरह सफेद हो जाते हैं, जबकि मार्च में बर्फ पिघलने लगती है और घाटियां हरी हो जाती हैं। इसलिए ये समय प्रकृति प्रेमियों के लिए सबसे बेस्ट है। होटल वालों का कहना है कि सोशल मीडिया और ट्रैवल वीडियोज ने चोपता को फेमस किया है, इस साल भी bookings बहुत हो रही हैं।

चोपता कैसे पहुंचें? ( How to reach Chopta )

सबसे पहले New Delhi, Harridwar, Rishikesh या Dehradun जैसे बड़े शहरों तक आइए। सड़क मार्ग सबसे आसान है। दिल्ली से चोपता ( Delhi to Chopta Distance) करीब 450 किमी है, 10-12 घंटे लगते हैं। दिल्ली से ऋषिकेश या हरिद्वार जाएं, फिर बस, टैक्सी या अपनी गाड़ी से रुद्रप्रयाग-उखीमठ होते हुए चोपता पहुंचें। हवाई जहाज से देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से टैक्सी लें। ट्रेन से हरिद्वार या ऋषिकेश सबसे नजदीक हैं।

यात्रा प्लान ( Travel Plan of chopta)

यात्रा प्लान करते वक्त मौसम चेक करें। फरवरी में ठंड जीरो से नीचे जाती है, तो गर्म कपड़े, दस्ताने, जैकेट और ट्रेकिंग जूते जरूर ले जाएं। मार्च में थोड़ा सुकून मिलता है, लेकिन सुबह-शाम ठंड रहती है। मेडिकल किट, टॉर्च, पानी और एनर्जी बार साथ रखें, ट्रेकिंग में काम आएंगे। चोपता पहुंचकर पहले घास के मैदान और जंगलों में घूमें। फिर तुंगनाथ मंदिर का ट्रेक शुरू करें। ये दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है, 3680 मीटर ऊंचाई पर। चोपता से 3.5 किमी दूर, मध्यम मुश्किल का ट्रेक। सुबह जल्दी निकलें तो बर्फीले पहाड़ों का कमाल का नजारा दिखेगा। मंदिर में शिवजी के दर्शन करें, ये पंच केदार का हिस्सा है। फिर चंद्रशिला पीक जाएं, तुंगनाथ से 1.5 किमी। ये ट्रेक थोड़ा कठिन है, लेकिन नंदा देवी, त्रिशूल-चौखंभा चोटियों का शानदार व्यू मिलेगा।

एक्सपर्ट कहते हैं ( What Expert say )

एक्सपर्ट कहते हैं, 2-3 दिन का प्लान बनाएं। पहले दिन चोपता घूमें-आराम करें। दूसरे दिन ट्रेक करें। तीसरे दिन आसपास देखें। कैंपिंग और बोनफायर भी मजा देते हैं। रहने के लिए बजट होटल से लग्जरी तक सब मिलेगा। पहाड़ी खाना ट्राई करें। पर्यावरण बचाने के लिए प्लास्टिक न लाएं, साफ-सफाई रखें।सरकार सड़कें और सुविधाएं सुधार रही है। जिम्मेदारी से घूमें तो चोपता इको-टूरिज्म का बड़ा सेंटर बनेगा। फरवरी-मार्च 2026 में चोपता बर्फीली चोटियों, हरी वादियों और आध्यात्मिक माहौल के साथ यादगार ट्रिप देगा।

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