बहुत महत्वपूर्ण है शीतला अष्टमी व्रत, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और महत्व | Sheetala Ashtami

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आलेख-: आचार्य पंडित प्रकाश जोशी, गेठिया नैनीताल

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी व्रत मनाया जाता है। इस बार दिनांक 11 मार्च 2026 दिन बुधवार को शीतला अष्टमी व्रत मनाया जाएगा। स्कंद पुराण के अनुसार शीतला देवी चेचक, छोटी माता जैसे रोगों को दूर करने वाली माता है। यह देवी हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते धारण किए होती है। तथा गर्दभ की सवारी पर अभय मुद्रा में विराजमान है। शीतला माता के संग ज्वरासुर(ज्वर का दैत्य) हैजे की देवी, चौंसठ रोग,घेंटूकर्ण, त्वचा रोग के देवता, एवं रक्त वती देवी विराजमान होती है। इसके कलश में दाल के दानों के रूप में विषाणु या शीतल स्वास्थ्यवर्धक एवं रोगाणु नाशक जल होता है। ऐसा माना जाता है कि यह शक्ति अवतार है और भगवान शिव की जीवन संगिनी है।

शीतला अष्टमी का महत्व-:
माता शीतला को आरोग्य की देवी माना जाता है, जो चेचक, खसरा, फोड़े फुंसी और त्वचा संबंधी रोगों से रक्षा करती है। यह व्रत वैज्ञानिक आधार पर भी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव करता है। इस दिन व्रत करने से परिवार में शीतलता और निरोगी काया का आशीर्वाद मिलता है। सबसे महत्वपूर्ण इस दिन शीतला देवी मंदिर में दुर्गा सप्तशती का पाठ करवाना बहुत श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति वर्ष भर निरोगी रहता है।

शुभ मुहूर्त-:
इस वर्ष शीतला अष्टमी व्रत दिनांक 11 मार्च 2026 दिन बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन यदि अष्टमी तिथि की बात करें तो प्रातः 1:54 बजे से अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी और 12 मार्च की प्रातः 4:19:00 समाप्त होगी। यदि पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करें तो 11 मार्च की प्रातः 6:35 बजे से शाम 6:27 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त है।

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