सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाया जाएगा इस बार कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत

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आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत के नाम से जाना जाता है। इस बार यह महत्वपूर्ण व्रत दिनांक 3 जुलाई 2026 दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा।

शुभ मुहूर्त-:
इस दिन यदि चतुर्थी तिथि की बात करें तो 15 घड़ी दो पल अर्थात प्रातः 11:21 से चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। इस दिन श्रवण नामक नक्षत्र प्रातः 11: 47 तक रहेगा। यदि इस दिन के चंद्रमा की स्थिति को जानें तो इस दिन चंद्र देव रात्रि 12:48 तक मकर राशि में विराजमान रहेंगे
सबसे महत्वपूर्ण इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग की बात करें तो यह योग प्रातः 5:20 से प्रातः 11: 47 तक रहेगा। इस दिन चंद्र देव को अर्घ्य देने के उपरांत ही व्रत तोड़ा जाता है। यदि इस दिन के चंद्रोदय की बात करें तो इस दिन रात्रि 9:54 में चंद्रोदय होगा, भिन्न-भिन्न स्थानों में चंद्रोदय का समय भिन्न-भिन्न हो सकता है।

कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा-:
इस चतुर्थी की कथा को भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी। उन्होंने कहा कि हे कुंती पुत्र! आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी के गणेश जी का नाम लंबोदर है। द्वापर युग में माहिष्मती नगरी में महीजीत नामक राजा था। वह बड़ा प्रतापी और पुण्यवान था। वह प्रजा का पालन संतान की तरह करता था परंतु वह खुद संतान हीन था।
समय व्यतीत होता चला गया और उसकी आयु क्षीण होती गई। राजा वृद्ध हो गया किंतु उसे संतान न प्राप्त हुई। तो तुरंत राजा ने विद्वान ब्राह्मण ज्ञानी जनों एवं प्रजा से इस विषय में विचार विमर्श किया। विद्वान ब्राह्मण ज्ञानियों ने कहा कि हे राजन! हम लोग वह सभी प्रयत्न करेंगे जिससे आपके वंश की वृद्धि हो। ऐसा कह कर सभी ब्राह्मण वन को चले गए। वन में प्रजा और ब्राह्मणों को एक मुनि श्रेष्ठ तपस्या में लीन नजर आए। उनका नाम लोमस ऋषि था। प्रजा एवं ज्ञानी जन त्रिकालदर्शी महर्षि लोमस के दर्शन करने लगे। और उनका आदर सत्कार करने लगे। इसके बाद प्रजा ने कहा हे ऋषिवर हम लोगों के दुख का कारण सुनिए अपने कष्ट के निवारण हेतु हम लोग आपके समक्ष आए हैं।
महर्षि लोमश ने पूछा सज्जनों आप लोग यहां किस काम से उपस्थित हुए हैं?
प्रजा जनों ने उत्तर दिया, “हे मुनिवर ! हम माहिष्मति नगरी के निवासी हैं। हमारे राजा का नाम महीजित है। वह राजा प्रजा पालक है, परन्तु ऐसे उत्तम राजा को आज तक सन्तान प्राप्ति नहीं हुई है। हे महर्षि! आप कोई ऐसी युक्ति बताइए, जिससे राजा को सन्तान की प्राप्ति हो।
प्रजा की बात सुनकर महर्षि लोमश ने कहा, “हे प्रजा जनों! आप लोग ध्यानपूर्वक सुनो। मैं संकट नाशन व्रत का वर्णन कर रहा हूं। यह व्रत निःसन्तान को सन्तान और निर्धनों को धन प्रदान करता है।

आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी को एकदन्त नामक गणेशजी की पूजा करें। पूर्वोक्त विधि से राजा व्रत करके श्रद्धापूर्वक ब्राह्मण भोजन कराएं और उन्हें वस्त्र दान करें। गणेश जी की कृपा से उन्हें अवश्य ही पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी।’ महर्षि लोमश की यह बात सुनकर सभी लोग करबद्ध होकर उठ खड़े हुए। नतमस्तक होकर दण्डवत प्रणाम करके समस्त प्रजा जन नगर में लौट आए। प्रजा जनों ने वन में घटित सभी घटनाओं का वर्णन राजा के समक्ष किया। प्रजा जनों की बात सुनकर राजा बहुत ही प्रसन्न हुए तथा उन्होंने श्रद्धापूर्वक विधिवत गणेश चतुर्थी का व्रत करके ब्राह्मणों को भोजन वस्त्रादि का दान दिया। बाद में रानी सुदक्षिणा को गणेश जी कृपा से सुन्दर एवं सुलक्षण पुत्र प्राप्त हुआ। श्रीकृष्ण जी ने कहा, हे राजन! इस व्रत का ऐसा ही दिव्य प्रभाव हैं। जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक करता है, वह समस्त प्रकार के सांसारिक सुखों को भोगता है। हे महाराज! आप भी इस व्रत को विधिपूर्वक कीजिए। श्री गणेश जी की कृपा से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी। आपके सम्पूर्ण शत्रुओं का विनाश होगा तथा आपको अचल राज्य की प्राप्ति होगी।

आलेख के लेखक -: ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल

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