सावधान! होलाष्टक की अवधि में बिल्कुल वर्जित है शुभ कार्य

0
21

आलेख -: आचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल

होलाष्क दो शब्दों से बना है,होला+अष्टक। अर्थात होली के आठ दिन। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलिका दहन तक 8 दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं, और इन्हें आठ पवित्र दिनों के रूप में माना जाता है। यह धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय है, परन्तु जिसमें शुभ कार्यों को करना वर्जित माना गया है। इस अवधि में पूजा-पाठ और भक्ति का विषेश महत्व है, जबकि मांगलिक कार्यों और नये कार्यों की शुरुआत टालने की सलाह दी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दिनों में पूजा-पाठ, जप-तप और भगवान की आराधना का विशेष महत्व होता है। वहीं विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्यों की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। शास्त्रों और लोक परंपराओं में इस अवधि को आत्मचिंतन और भक्ति के लिए उपयुक्त समय माना गया है। जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल की प्राप्ति हो सके।

इस वर्ष 2026 में होलाष्टक दिनांक 24 फरवरी, मंगलवार से शुरू होकर 3 मार्च 2026 तक रहेगा। इसी दौरान दिनांक 27 फरवरी 2026 दिन शुक्रवार को आंवला एकादशी या रंग भरी एकादशी व्रत मनाया जाएगा। इस दिन भद्रा काल प्रातः 11:32 से रात्रि 10:33 तक रहेगा, अतः रंग ध्वजारोहण चीर बंधन प्रातः 11:32 तक करना चाहिए।यह अवधि फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलिका दहन तक मानी जाती है। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च को होली का पर्व पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। होलाष्टक हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और धार्मिक रूप से संवेदनशील समय माना जाता है। इस समय में विशेष रूप से शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है ताकि किसी प्रकार के अशुभ प्रभाव या बाधा से बचा जा सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here