क्या होता है नौतपा? और कब से शुरू हो रहा है? आईए जानते हैं

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हमारे ज्योतिष शास्त्रों में ग्रहों का प्रभाव मात्र मानव जीवन में ही नहीं अपितु संपूर्ण प्रकृति में होता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसा ही एक शब्द है “नौतपा“अर्थात इन नौ दिनों में हमारी धरती सबसे अधिक तपती है। ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य देव चंद्र देव के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करते हैं उस दिन से 9 दिन तक धरती सर्वाधिक तपती है। इन्हीं 9 दिनों की अवधि को “नौतपा” कहा जाता है। इस बार ज्येष्ठ अधिक शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दिनांक 25 मई 2026 की शाम 3:37 बजे से सूर्य देव चंद्र देव के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश कर चुके हैं। हालांकि सूर्य देव इस नक्षत्र में 8 जून की दोपहर 1:33 तक रहेंगे, परंतु 25 मई से 9 दिन तक धरती सर्वाधिक तपेगी। मान्यता के अनुसार नौतपा का ज्योतिष के साथ-साथ पौराणिक महत्व भी है। ज्योतिष के सूर्य सिद्धांत और श्रीमद् भागवत में नौतपा का वर्णन आता है। हमारे सनातन संस्कृति में सदियों से सूर्य को देवता के रूप में पूजा जाता रहा है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चंद्रमा और देवता ब्रह्मा है। What is Nautapa ?

नौतपा का जितना महत्व शास्त्र में है उतना ही वैज्ञानिक भी अब इसे मानते चले आ रहे हैं। नौतपा के प्रारंभिक तीन दिनों में पहनावे और खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सूती वस्त्र धारण करना चाहिए ताकि त्वचा संबंधी रोगों से बचा जा सके। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार यह समय पापाक्रांत समय होता है। इस दौरान उदर रोग अर्थात पेट संबंधी बीमारियों के होने की संभावना सर्वाधिक होती है। हल्का भोजन लें और पानी अधिक से अधिक पिए। मौसम के हिसाब से होने वाली व्याधियों से बचने की आवश्यकता है।


सूर्य ताप, तेज का प्रतीक है, जबकि चंद्र शीतलता का। चंद्र से धरती को शीतलता प्राप्त होती है।सूर्य जब चंद्र के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है तो इससे वह उस नक्षत्र को अपने पूर्ण प्रभाव में ले लेता है। जिस तरह कुंडली में सूर्य जिस ग्रह के साथ बैठ जाए वह ग्रह अस्त के समान हो जाता है, उसी तरह चंद्र के नक्षत्र में सूर्य के आ जाने से चंद्र के शीतल प्रभाव क्षीण हो जाते हैं यानी पृथ्वी को शीतलता प्राप्त नहीं हो पाती। इस कारण ताप अधिक बढ़ जाता है।

आलेख के लेखक-: ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी, गेठिया, नैनीताल

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