सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी नाम से जाना जाता है। इस बार यह व्रत दिनांक 9 अगस्त 2026 दिन रविवार को मनाया जाएगा। इस बार कई महत्वपूर्ण संयोग इस दिन बन रहे हैं। जहां एक और हर्षण योग तो वहीं दूसरी ओर महालक्ष्मी राजयोग भी इस दिन बन रहा है। वही यह दिन भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक, पार्थिव पूजन, एवं महामृत्युंजय जाप आदि के लिए भी बहुत श्रेष्ठ दिन बन गया है।
शुभ मुहूर्त-:
इस दिन यदि एकादशी तिथि की बात करें तो 13 घड़ी 32 पल अर्थात प्रातः 11:05 तक एकादशी तिथि रहेगी। यदि नक्षत्र की बात करें तो मृगशिरा नामक नक्षत्र 22 घड़ी 37 पल अर्थात दोपहर 2:45 तक रहेगा। यदि हर्षण योग की बात करें तो यह योग रात्रि 2:03 तक रहेगा जो आनंद और उत्साह बढ़ाने वाला माना जाता है। बात यदि महालक्ष्मी राज योग की करें तो इस दिन प्रातः 3:48 बजे चंद्र देव के मिथुन राशि में गोचर करते ही मंगल देव के साथ उनकी युति से यह शुभ राजयोग बनेगा।
इसके अतिरिक्त सबसे महत्वपूर्ण यह दिन पार्थिव पूजन के लिए, रुद्राभिषेक एवं महामृत्युंजय जाप आदि के लिए भी बहुत श्रेष्ठ दिन है इस दिन भगवान भोलेनाथ प्रातः 11:05 तक कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे, तदुप्रांत भगवान भोलेनाथ वृषभारूढ़ अर्थात नंदी महाराज की सवारी करेंगे। यह दोनों ही स्थिति, दोनों ही समय अभिषेक के लिए और महामृत्युंजय जाप आदि के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। क्योंकि शिव वास गणना के आधार पर-
कैलाशे लभते सौख्यं गौर्या च सुख सम्पद:।
वृषभेअ्भीष्ट सिद्धि: सभायां संताप कारिणी।।
अर्थात-:
“कैलाशे लभते सौख्यं “ का अर्थ है-भगवान शिव यदि कैलाश पर्वत पर विराजमान हो वह समय या स्थिति साधक के लिए सुख और शांति देने वाली होती है। “वृषभेअ्भीष्ट सिद्धि:”का अर्थ है भगवान शिव यदि नंदी महाराज की सवारी कर रहे हों तो यह समय या स्थिति साधक को सिद्धि प्रदान करने वाली होती है।
कामिका एकादशी व्रत कथा।
एक बार कुंती पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से श्रावण कृष्ण पक्ष एकादशी अर्थात कामिका एकादशी व्रत के बारे में पूछा कि हे भगवान! आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी तथा चातुर्मास महात्म्य मैंने भली प्रकार से सुना। अब कृपा करके सावन कृष्ण एकादशी का क्या नाम है वह बताइए। श्री कृष्ण भगवान कहने लगे कि हे धर्मराज ! इस कथा को स्वयं ब्रह्मा जी ने देवर्षि नारद से कही थी वही कथा मैं तुमसे कहता हूं। नारद जी ने ब्रह्मा जी से पूछा था की हे पितामह! सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की मेरी इच्छा है। उसका क्या नाम है? क्या विधि है और उसका महात्म्य क्या है? सो कृपा करके बताइए। नारद जी के यह वचन सुनकर ब्रह्मा जी ने कहा हे नारद ! लोगों के हित के लिए आपने बहुत सुंदर प्रश्न किया है। सावन मास की कृष्ण पक्ष एकादशी का नाम कामिका एकादशी है। उसके सुनने मात्र से ही वाजपेई यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन शंख चक्र गदा धारी विष्णु भगवान का पूजन होता है। जिनके नाम श्रीधर हरि, विष्णु माधव मधुसूदन है। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो। जो फल गंगा काशी नैमिषारण्य और पुष्कर में स्नान से मिलता है वह विष्णु भगवान के पूजन से मिलता है। जो फल सूर्य व चंद्र ग्रहण पर कुरुक्षेत्र और काशी में स्नान करने से, समुद्र वन सहित पृथ्वी दान करने से सिंह राशि के बृहस्पति में गोदावरी और गंडकी नदी में
स्नान से भी नहीं प्राप्त होता वह भगवान विष्णु के पूजन से सहज में मिलता है। जो मनुष्य सावन में भगवान का पूजन करते हैं उनसे देवता गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं। अतः पापों से डरने वाले मनुष्य को कामिका एकादशी का व्रत और विष्णु भगवान का पूजन अवश्य करना चाहिए। पाप रूपी कीचड़ में फंसे हुए और संसार रूपी समुद्र में डूबे मनुष्य के लिए इस एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु का पूजन अत्यंत आवश्यक है। इससे बढ़कर पापों के नाश का कोई उपाय नहीं है। हे नारद ! स्वयं भगवान ने यही कहा है कि कामिका एकादशी व्रत से जीव बुरी योनि को प्राप्त नहीं होता है। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन भक्ति पूर्वक तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पण करते हैं वह इस संसार के समस्त पापों से दूर रहते हैं। विष्णु भगवान रत्न मोती मणि तथा आभूषण आदि से इतने प्रसन्न नहीं होते जितने की तुलसी दल से होते हैं। तुलसी दल पूजन का फल चार भार चांदी और एक भार स्वर्ण के दान के बराबर होता है। हे नारद ! मैं स्वयं भगवान की अति प्रिय तुलसी को नमस्कार करता हूं। तुलसी के पौधे को सींचने से मनुष्य की सब यातनाएं नष्ट हो जाती हैं। दर्शन मात्र से सब पाप नष्ट हो जाते हैं। और स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है।कामिका एकादशी की रात्रि को दीपदान तथा जागरण के फल का महात्त्य चित्रगुप्त भी नहीं कह सकते। जो इस एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पित्र स्वर्ग लोक में अमृत पान करते हैं। तथा जो घी या तेल का दीपक जलाते हैं वह 100 करोड़ दीपकों से प्रकाशित होकर सूर्य लोक को जाते हैं। ब्रह्मा जी कहते हैं की हे नारद !ब्रह्महत्या तथा भ्रूण हत्या आदि पापों को नष्ट करने वाली इस कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य को यत्न के साथ करना चाहिए। कामिका एकादशी के व्रत का महात्म्य श्रद्धा से सुनने और पढ़ने वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है।
कामिका एकादशी व्रत की एक दूसरी पौराणिक कथा
एक समय की बात है, एक गांव में एक बहुत शक्तिशाली क्षत्रिय निवास करता था।अपनी शक्ति और बल पर उस क्षत्रिय को गर्व था।लेकिन उसके धार्मिक स्वभाव के बावजूद, अहंकार उसके मन में घर कर चुका था। वह हर दिन भगवान विष्णु की पूजा करता और उनकी उपासना में लीन रहता था। एक दिन, वह किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए यात्रा पर निकला। रास्ते में उसकी भेंट एक ब्राह्मण से हो गई। दोनों में किसी बात पर विवाद हो गया जिसके बाद क्षत्रिय ने ब्राह्मण के साथ हाथापाई शुरू कर दी। ब्राह्मण अपनी दुर्बलता के कारण क्षत्रिय के आघात को सहन न कर सके और उनकी मृत्यु हो गई। ब्राह्मण की मृत्यु से क्षत्रिय हक्का बक्का रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और वह बहुत पछताया। उसकी यह स्थिति गांव में चर्चा का विषय बन गई। क्षत्रिय युवक ने गांव वालों से क्षमा याचना की और ब्राह्मण का अंतिम संस्कार खुद करने का वचन दिया। लेकिन पंडितों ने अंतिम क्रिया में शामिल होने से इंकार कर दिया। तब उसने ज्ञानी पंडितों से अपने पाप को जानना चाहा, तो पंडितों ने उसे बताया कि उसे ‘ब्रह्म हत्या दोष’ लग चुका है। इसलिए हम अंतिम क्रिया के ब्राह्मण भोज में आपके घर भोजन नहीं कर सकते है। यह सुनकर क्षत्रिय ने ‘ब्रह्म हत्या दोष’ के प्रायश्रित का उपाय पूछा तब पंडितों ने कहा कि, जब तक वह सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विधि पूर्वक भगवान विष्णु की पूजा नहीं करता, और ब्राह्मणों को भोजन नही कराता और दान दक्षिणा नही देता तब तक वह ब्रह्म हत्या दोष से मुक्त नहीं हो सकता है।
क्षत्रिय ने ब्रह्मण के अंतिम संस्कार के बाद पंडितों की सलाह मानते हुए, कामिका एकादशी के दिन पूरी श्रद्धा और विधि के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा की। फिर उसने ब्राह्मणों को भोजन कराया और दान दक्षिणा भी दी। इस तरह, भगवान विष्णु की कृपा से वह क्षत्रिय ‘ब्रह्म हत्या दोष’ से मुक्त ) हुआ।
कामिका एकादशी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,कामिका एकादशी का व्रत रखने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्रत पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में भी सहायक होता है। कहा जाता है कि कामिका एकादशी का स्मरण मात्र करने से ही वाजपेय यज्ञ के बराबर फल की प्राप्ति होती है। इस दिन तुलसी जी की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।
तो बोलिए भगवान विष्णु की जै। माता लक्ष्मी की जै।
आलेख -: आचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल



















