आलेख -: आचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल
इस बार हिंदू नव वर्ष दिनांक 19 मार्च 2026 से प्रारंभ होगा। इस वर्ष के राजा देव गुरु बृहस्पति हैं तो वहीं मंत्री मंगल देव हैं। यह संवत्सर “रौद्र” नामक संवत्सर रहेगा। इसी दिन से चैत्र नवरात्र प्रारंभ होंगे। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 6:54 से 10:20 तक रहेगा। चंद्रमा की स्थिति के अनुसार मेष, सिंह, धनु राशि को वर्ष अपैट रहेगा। इसके अतिरिक्त इस बार जेष्ठ का महीना अधिक मास पुरुषोत्तम मास रहेगा, इसकी अवधि 17 मई से 15 जून तक रहेगी। इस वर्ष भूमंडल में दो सूर्य ग्रहण और एक चंद्र ग्रहण लगेगा परंतु भारत में कोई भी ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा। कुंभ, मीन, और मेष राशि में शनि की साढ़ेसाती रहेगी।
रौद्र संवत्सर में राजाओं (राजनेताओं/ शासकों) में परस्पर मतभेद एवं क्षोभ बना रहेगा। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते देश को हानि पहुंचाने से कोई भी गुरेज नहीं करेगा। अन्न तथा जल का अभाव बना रहेगा। पृथ्वी में रोगों से मनुष्य त्रस्त, चौपायों में कष्ट, शासन में उलट फेर की स्थिति तथा वर्षा में कमी होगी। चैत्र आदि तीन मासों में महंगाई, आषाढ़ एवं सावन में अल्प वर्षा तथा खंण्डवृष्टि, भाद्रपद मास में अधिक वर्षा, मसालों में तेजी, जनजीवन सुखी तथा चतुष्पादों में कष्ट होगा।
अन्य मत अनुसार संपूर्ण धरा में उत्पात एवं वर्षा में कमी जगत में हाहाकार से जनजीवन को कष्ट होगा। धन की कमी कथा चोरी और तस्करी चरम पर रहेंगे। इस वर्ष राजा गुरु है जिनके पास सस्येश,निर्सेश (सूखे फल तथा मेवा) और धनेश विभाग हैं। और मंत्री मंगल देव हैं धान्येश बुध हैं। वर्षा प्रबंधन उद्यान एवं फल विभाग तथा रक्षा विभाग चंद्र देव के पास एवं रस पदार्थ शनिदेव के पास हैं।
10 में से आठ विभाग शुभ ग्रहों के अधीन होने से अशुभ फलों में न्यूनता रहेगी। गोरस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होगा विप्र वर्ग यज्ञ आदि कर्म करके अच्छा जनार्दन करेंगे तथा धार्मिक कार्यों में लोगों की रुचि बढ़ेगी। दक्षिण और पश्चिम क्षेत्र में वर्षा कम, चौपायों में रोग एवं कष्ट रहेगा। फल फूल की अधिकता रहेगी। व्यापार में लाभ, नए प्रकार के व्यवसाय प्रभावी होंगे। वर्ष एवं वर्षेश लग्न अनुसार देश में प्रगतिकारी योजनाओं का क्रियान्वयन होगा। जनजीवन सुखद होगा। सीमाओं पर युद्ध। स्थितियां प्रतिकूल रहने के बाद भी उद्योगों में वृद्धि होगी। भारत शीर्षस्थ स्थान पर रहते हुए व्यापार एवं आर्थिक क्षेत्र में प्रगतिशील रहेगा। पूर्वोत्तर तथा दक्षिण पश्चिम क्षेत्र में स्थिति चिंतनीय रहेगी। वर्ष के पहले छठे तथा 12वें मास कष्टकारी रहेंगे, शेष वर्ष शुभ फल प्रद रहेगा।



















