वृषभ राशि में शुक्र, चंद्रमा का अत्यंत दुर्लभ और अद्भुत संयोग इस बार अक्षय तृतीया पर

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आलेख-: ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल।

“अक्षय” का अर्थ है जो कभी क्षय ना हो या नष्ट ना हो। अर्थात इस दिन किया हुआ दान पुण्य कभी क्षय नहीं होता है। और इस दिन खरीदी हुई जमीन वाहन या आभूषण चिरकाल तक रहता है। इस बार दिनांक 19 अप्रैल 2026 दिन रविवार को अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाएगा। इस बार अक्षय तृतीया पर शुक्र और चंद्रमा का अत्यंत दुर्लभ और अद्भुत संयोग बन रहा है। शुक्र ग्रह का वृषभ राशि में प्रवेश, चंद्रमा की उच्च स्थिति और अन्य ग्रहों की युति से कई राजयोगों का निर्माण हो रहा है। जैसे की गौरी योग , धन योग मालव्य और नीच भंग राजयोग।
अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम जन्मोत्सव मनाया जाता है। यह दिन यज्ञोपवीत संस्कार, चूड़ाकरण संस्कार, गृह प्रवेश, सहित वाहन जमीन एवं सोने के आभूषण खरीदने के लिए भी सर्वश्रेष्ठ दिन माना जाता है।

शुभ मुहूर्त-:
इस दिन यदि तृतीया तिथि की बात करें तो 12 घड़ी 42 पल अर्थात प्रातः 10:49 बजे से तृतीया तिथि प्रारंभ होगी। यदि रोहिणी नक्षत्र की बात करें तो यह नक्षत्र प्रातः 7:10 पर उदय होगा। आयुष्मान योग 35 घड़ी 45 पल अर्थात शाम 8:02 तक रहेगा। इस दिन चंद्र देव दोपहर 12:31: से वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे।
अक्षय तृतीया से संबंधित अनेकों पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि इसी दिन सुदामा अपने मित्र कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे थे। सुदामा ने दरिद्रता में भी कृष्ण को चावल की पोटली दी इसके बदले भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें बिना मांगे ही अपार समृद्धि दी, इसलिए यह दिन दरिद्रता के अंत का प्रतीक भी माना जाता है। बात यदि महाभारत की करें तो इसमें अक्षय पात्र की कथा आती है, इस कथा के अनुसार वनवास के दौरान जब पांडव भूख से परेशान थे तब भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को आज ही के दिन “अक्षय पात्र” भेंट किया था। इस जादुई पात्र में भोजन कभी समाप्त नहीं होता था, और जब तक द्रोपदी भोजन नहीं कर लेती तब तक कितना भी भोजन परोसा जा सकता था।

अक्षय तृतीया की महत्वपूर्ण पौराणिक कथा-:
प्राचीन काल में सदाचारी तथा देव ब्राह्मणों में श्रद्धा रखने वाला धर्मदास नामक एक वैश्य था। उसका परिवार बहुत बड़ा था। इसलिए वह सदैव व्याकुल रहता था। उसने किसी के मुख से इस व्रत के महत्व को सुना था। कालांतर में जब वह पर्व आया तो उसने गंगा स्नान किया। विधिपूर्वक देवी देवताओं की पूजा की। गोले के लड्डू, पंखा, जल से भरे घड़े, जौं ,गेहूं, नमक, सत्तू, दही, चावल तथा वस्त्र आदि दिव्य वस्तुएं ब्राह्मणों को दान की। स्त्री के बार-बार मना करने, कुटुंब जनों से चिंतित रहने, तथा बुढ़ापे के कारण अनेक रोगों से पीड़ित होने पर भी वह अपने धर्म कर्म और दान पुण्य से विमुख न हुआ। यही वैश्य दूसरे जन्म में कुशावती का राजा बना। अक्षय तृतीया के दान के प्रभाव से वह बहुत धनी तथा प्रतापी बना। वैभव संपन्न होने पर भी उसकी बुद्धि कभी धर्म से विचलित नहीं हुई। अक्षय तृतीया के दिन इस कथा के श्रवण करने से अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

खरीदारी का शुभमुहूर्त-:
इस दिन सोना चांदी भूमि या वाहन खरीदने का सबसे उत्तम समय प्रातः 10:49 से 20 अप्रैल की प्रातः 5:51 तक रहेगा जो लगभग 19 घंटे का अबूझ मुहूर्त है। दोपहर 1:58 से 3:35 का समय सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। यद्यपि अक्षय तृतीया के दिन संपूर्ण दिन खरीदारी के लिए शुभ माना जाता है इसके बावजूद भी राहुकाल का ध्यान रखना उचित रहेगा। इस दिन राहुकाल शाम 5:12 से 6:49 तक रहेगा। राहुकाल के दौरान खरीदारी करना शुभ नहीं माना जाता है।

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