आलेख -: ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल
इस बार दिनांक 14 अप्रैल 2026 को विषुवत संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। विषुवत संक्रांति पर्व बहुत महत्वपूर्ण है, वर्ष का आरंभ यद्यपि चंद्र मास के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से ही होता है, तथापि सौर मास क्रम में मेष संक्रांति से वर्ष का प्रारंभ होना उससे कम महत्वपूर्ण नहीं कहा जा सकता है। इस दिन सूर्य देव 12 राशियों को पूर्ण करके पुनः मेष राशि में प्रवेश करते हैं। जिस प्रकार वर्ष अनेक राशियों के लिए अपैट (चंद्रबल) ठीक नहीं होता है, इसी प्रकार विषुवत संक्रांति के आधार पर सौर वर्ष के अनुसार भी कई राशियों के लिए वर्ष ठीक नहीं होता है। प्रायः रोग व्याधियां उस राशि के लिए प्रभावी होती है। सामान्य भाषा में उसे विषुवत संक्रांति बाएं पैर जाना कहते हैं। प्रतिवर्ष 27 नक्षत्रों में से तीन नक्षत्रों की स्थिति बाएं पैर में होती है। इस वर्ष जिन तीन नक्षत्रों की स्थिति बाएं पैर में है वह हैं कुंभ और मीन राशि के तीन नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, और रेवती। अतः इन राशियों के जातकों को 14 अप्रैल के दिन चांदी के बाएं पैर की आकृति, सफेद वस्त्र, चावल, दही, दूध, चीनी, आदि सफेद वस्तुएं दक्षिणा सहित दान करनी चाहिए। जहां तक संभव हो विषुवत संक्रांति के दिन ही दान करना चाहिए अन्यथा वैशाख मास में कभी भी दान कर सकते हैं।
कपाले भूपालस्तदनु वदने पण्डित वरो।
धनाध्यक्षो वक्षे अनुपम वधू दक्षिण करे।।
करे वामे भैक्ष्यं भ्रमणमथवा दक्षिणपदे।
पदेवामे मृत्युर्भवति निज नक्षत्र गणनात्।।
अर्थात-: जन्म नक्षत्र यदि सिर के सात में है तो यश प्राप्ति, मुंह के तीन में विद्या उन्नति, हृदय के पांच में धन लाभ, दाहिने हाथ के तीन में दांपत्य सुख, बाएं हाथ के तीन में अर्थाभाव, दाहिने पैर के तीन में निरर्थक भ्रमण, तथा बाएं पैर के तीन में रोग आदि फल उस वर्ष के लिए प्रभावी रहता है।
विषुवत संक्रांति के दिन प्रत्येक व्यक्ति बूढ़े बच्चे रोगी आदि सभी को स्नान करना अनिवार्य होता है। शत् प्रतिशत संपूर्ण स्नान, अर्थात शरीर के जिस भाग में जल ना पहुंचे वहां विष पैदा होता है कुमाऊं में ऐसी एक धारणा है। स्वस्थ व्यक्ति को तो संभव हो सके किसी पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए यदि संभव न हो तो स्नान की जल में गंगाजल मिलाकर या स्वर्ण मिश्रित गोमूत्र से स्नान करना चाहिए। इस दिन शरीर के किसी भी भाग में तेल का उपयोग नहीं करना चाहिए इससे भी विष पैदा होता है, कुमाऊं में यह भी एक धारणा है। कुमाऊं के कई भागों में इस दिन लोहे की गर्म शलाका शरीर में लगाने का विधान है इससे भी शरीर का विष नष्ट होता है।
देवभूमि उत्तराखंड के कुमाऊं संभाग में इस दिन मेले भी लगते हैं, इन्हीं मेलों में द्वाराहाट स्याल्दे का बिखौती मेला प्रसिद्ध है। जो अल्मोड़ा जनपद के द्वाराहाट से लगभग 8 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध शिव मंदिर विभाण्डेश्वर महादेव में लगता है जहां लगभग एक माह पूर्व से मेले की तैयारियां प्रारंभ हो जाती हैं क्योंकि यह उसे क्षेत्र का बड़ा आयोजन है। इसकी अतिरिक्त गंगोलीहाट के रामेश्वरम में और अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम में भी इस दिन मेला लगता है।



















