महालय पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी व्रत नाम से जाना जाता है। संयोग से इस बार यह व्रत सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाया जाएगा।
शुभ मुहूर्त-:
इस बार दिनांक 6 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार को इंदिरा एकादशी व्रत मनाया जाएगा। इस दिन यदि एकादशी तिथि की बात करें तो मध्य रात्रि 12:35 तक एकादशी तिथि रहेगी। यदि नक्षत्र की बात करें तो अश्लेषा नमक नक्षत्र रात्रि 10:17 तक रहेगा यदि योग की बात करें तो सिद्धि योग प्रातः 7:20बजे तक रहेगा इस दिन चंद्र देव रात्रि 10:17 बजे तक कर्क राशि में विराजमान रहेंगे। यदि सर्वार्थ सिद्धि योग की बात करें तो यह योग प्रात: 6:11 बजे से रात्रि 10:17बजे तक रहेगा।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन विष्णु भगवान की पूजा करने से देवता ही नहीं वरन पित्र भी प्रसन्न होते हैं। और अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस व्रत को करने से पितरों को भी मोक्ष प्राप्त होता है। इसलिए यह एकादशी व्रत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
एक सबसे महत्वपूर्ण बात पाठकों को बताना चाहूंगा कि इस व्रत में कथा श्रवण करना अर्थात कथा सुनना बेहद जरूरी है। बिना कथा सुने यह व्रत अधूरा माना जाता है। विना कथा सुने यह व्रत निष्फल होता है। इस व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। और व्रत करने से जो पुण्य प्राप्त होता है उसे अगर पितरों को दान करें तो उन्हें भी मोक्ष प्राप्त होता है। पंचम वेद कहे जाने वाले धर्म ग्रंथ महाभारत में इस एकादशी का उल्लेख किया गया है। जहां भगवान श्री कृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर को यह कथा सुनाते हैं।
भगवान श्री कृष्ण ने जो कथा धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई वह इस प्रकार है। पौराणिक कथा के अनुसार सतयुग में महिष्मति नामक एक नगर था। जिसमें प्रतापी राजा इंद्रसेन रहता था। वह अपनी प्रजा का पालन पोषण अपनी संतान की तरह करता था। इंद्रसेन के राज में किसी प्रकार का दुख दर्द रोग आदि कुछ नहीं था। कहा जाता है कि इंद्रसेन भगवान विष्णु का परम भक्त था। और भगवान विष्णु का बड़ा उपासक भी था। एक बार घूमते फिरते महर्षि नारद मुनि का आगमन इंद्रसेन की सभा में हुआ। महर्षि नारद इंद्रसेन के पिता का संदेश भी ला कर आए थे संदेश में पिता द्वारा कहा गया था कि पिछले जन्म में किसी भूल के कारण वह यमलोक में ही हैं। यमलोक से मुक्ति के लिए उनके पुत्र को इंदिरा एकादशी का व्रत रखना होगा और उस व्रत का पुण्य अपने पिता को देना होगा ताकि उन्हें मोक्ष प्राप्त हो सके। नारद मुनि के सुझाव के बाद आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को राजा इंद्रसेन ने व्रत रखा। व्रत से प्राप्त पुण्य को अपने पिता को दान कर दिया जिसके चलते राजा इंद्रसेन के पिता को नरक से मुक्ति मिली। भगवान विष्णु के पार्षद उन्हें नरक से विष्णु लोक को ले गए। अतः यह इंदिरा एकादशी व्रत अवश्य करना चाहिए।
आलेख -ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल



















