इस बार शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से प्रारंभ होंगे। इस वर्ष मां दुर्गा हाथी की सवारी पर धरती लोक में पधारेंगी। वैसे तो देवी मां का वाहन सिंह है, इसलिए उसे सिंह वाहिनी भी कहते हैं। परंतु नवरात्र में देवी मां एक विशेष वाहन से पधारतीं हैं।जिस दिन से नवरात्रि का प्रारंभ होता है उसी दिन के अनुसार माता अपनी सवारी अपने वाहन पर सवार होकर आतीं है। और इसी के अनुसार माता अपने भक्तों को एक विशेष प्रकार की सांकेतिक सूचना भी देती है।
देवी भागवत पुराण में मां दुर्गा की सवारी के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया है। जिससे आप यह पता लगा सकते हैं की किस दिन किस सवारी से माता धरती पर पधारेंगी? जिस संबंध में एक महत्वपूर्ण श्लोक लिखा है-
शशि सूर्य गजरूढ़ा,शनिभौमे तुरंग मे।
गुरौशुक्रे च दौलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता।।
अर्थात इस श्लोक के अनुसार यदि नवरात्रि सोमवार या रविवार से प्रारंभ होती है तो माता रानी हाथी पर विराजमान होकर आती हैं। यदि नवरात्रि शनिवार या मंगलवार से प्रारंभ हो तो माता रानी की सवारी घोड़ा होती है। यदि शुक्रवार और गुरुवार को नवरात्रि प्रारंभ हो तो माता रानी डोली में आती है। अंत में यदि नवरात्रि बुधवार से प्रारंभ हो तो माता रानी नौका में सवार होकर आती है। पहले नवरात्र को कलश स्थापना के साथ पूरे 9 दिनों तक दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है।
जैसा की दुर्गा सप्तशती में उल्लेख किया गया है-
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी तृतीयं चन्द्रघंटेत कूष्माण्डलेति चतुर्थकम। पंचमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनीती च सप्तमं कालरात्रि महागौरीतिचाष्ठमं नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकेतिता।।
अर्थात पहले नवरात्रि को मां शैलपुत्री की पूजा दिनांक 11 अक्टूबर 2026 दिन रविवार को शुभ मुहूर्त के अनुसार कलश स्थापना के साथ होगी।
शुभ मुहूर्त-
11 अक्टूबर को यदि प्रतिपदा तिथि की बात करें तो रात्रि 9:31 तक प्रतिपदा तिथि रहेगी। इस दिन चित्रा नक्षत्र रात्रि 10:32 तक है। वैघृती योग रात्रि 9:05 तक है। यदि घट स्थापना या कलश स्थापना की बात करें तो प्रातः 6:19 से 10:12 तक घट स्थापना का शुभ मुहूर्त है। यदि इस अवधि में घट स्थापना ना हो सके तो अभिजीत मुहूर्त में प्रातः 11:49 से दोपहर 12:37 तक घट स्थापना की जा सकती है। 12 अक्टूबर द्वितीय नवरात्र को ब्रह्मचारिणी की पूजा, 13 अक्टूबर तीसरी नवरात्रि को मां चंद्रघंटा की पूजा, 14 अक्टूबर चौथी नवरात्रि को मां कुष्मांडा की पूजा, 15 अक्टूबर पांचवी नवरात्र को स्कंदमाता की पूजा, 16 अक्टूबर छठे नवरात्र को कात्यायनी माता की पूजा, 17 अक्टूबर सातवीं नवरात्रि को माता कालरात्रि की पूजा, 18 अक्टूबर आठवीं नवरात्रि को महागौरी की पूजा एवं 19 अक्टूबर नवीं नवरात्र को सिद्धिदात्री मां की पूजा की जायेगी। 20 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार को विजया दशमी पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।
आलेख -ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल



















